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विश्रांति

                
                                                         
                            विश्रांति ~
                                                                 
                            

बंधें हैं आशा से
बंधें हैं प्रत्याशा से
विमुक्ति चाहते हैं
आशा से -प्रत्याशा से
मुक्त होकर
पंगु बनकर
शांत चित से
विश्रांति चाहते हैं ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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