मैंने उसे जकड़ा देखा...
परतंत्रता के जकड़ में
जकड़ है प्रेम का.....
प्रेम है वात्सल्य का
प्रत्याशा है अपनी जीत का
जीत है स्वतंत्रता की-
स्वच्छंदता कि -परिपूर्णता की
शाशन कर रही है परतंत्रता
शासित हो रही है स्वतंत्रता
चाहती है स्वतंत्रता
चाहती है करना शाशन
होना शासित नहीं
जकड़ है प्रेम का
प्रेम है वात्सल्य का....
जकड़ है स्व - निर्माण का , उत्थान का
ये जकड़ स्व की
ये परतंत्रता स्व की
ये जकड़ है उत्सर्ग का
जकड़ है प्रेम का
प्रेम है वात्सल्य का....
परतंत्रता में अवधान है
अवधान है प्रसन्नता का
अवधान है परतंत्रता में प्रसन्नता का
जकड़ है प्रेम का
प्रेम है वात्सल्य का....
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