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जिन्दगी पहले जैसी नही मोहब्बत तोड़कर।

                
                                                         
                            कितना मुश्किल होता अपनो को खोकर।
                                                                 
                            
जिन्दगी यादो के सहारे गुजरना रो रोकर।।

हर दिन उनकी कमी महसूस होती रहती।
नयनो में बेचैनी उन्हें सपनों को पिरो कर।।

वक्त का क्या वह पल पल गुज़रता रहता।
दिल वहीं ठहरा रहता मेरी जगह छोड़कर।।

वक्त के साथ बहुत रिश्ते नाते बदलते देखे।
खालीपन अन्दर ठहर गया नाता जोड़कर।।

कहने को वक्त हर ज़ख्म भर देता 'उपदेश'।
जिन्दगी पहले जैसी नही मोहब्बत तोड़कर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
51 मिनट पहले

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