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विदाई के बाद

                
                                                         
                            विदाई के बाद पति के साथ सुकून आया।
                                                                 
                            
बेहद चिपक कर बैठी अन्दर अमन आया।।

जरा भी वो न डिगा इतना कंट्रोल खुद पर।
मैं खुशी से फूली ना समाई क्या पति पाया।।

एक रात गुजारी दूसरी खुद-ब-खुद गुजरी।
मेरा इंतजार उसका लेपटॉप समझ न आया।।

तब तक पुरुष की उलझनों से वाकिफ न थी।
मर्दाना कमजोरी न कभी सुना न समझ पाया।।

व्यथित मन तरह-तरह की चिंताएँ 'उपदेश'।
किससे कहूँ कैसे कहूँ मन उथल-पुथल पाया।।

मेरी चिंता से ज्यादा इज़्ज़त घर परिवार की।
इलाज की राह सुझाकर पति का भरोसा पाया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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