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तेरा आसरा चाहती

                
                                                         
                            मैं माँगने वालों जैसी नही देना जानती।
                                                                 
                            
जरा खुशी के लिए तेरा आसरा चाहती।।

तुम्हारे भीतर एक कोना ऐसा चाहा था।
जहाँ वक्त गुजारने के लिए सुकून चाहती।।

एक ख्वाईश है कोई जिद्द नही की तुमसे।
तुम्हारी हर खुशी का कारण बनना चाहती।।

तुम्हें मेरी कमी महसूस हो 'उपदेश' हर वक्त।
पूरी कहानी नही उसका पन्ना बनना चाहती।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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21 घंटे पहले

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