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तक़दीर से खेला

                
                                                         
                            सुनसान में मिलता रहा हर रास्ता उसका।
                                                                 
                            
किसी को क्या पता मुझसे वास्ता उसका।।

उसने हर हालात में तकदीर से खेला मेरे।
मैं हार गई फिर भी न छोड़ा रास्ता उसका।।

रंज है फिर भी दिल बेताब होकर कहता।
असमंजस में पड़ा बिराना रास्ता उसका।।

अपने रहमोकरम से प्यासी ही रह जाऊँगी।
मेरा सहारा बनकर छूट गया रास्ता उसका।।

मिले भी तो किसी और मौसम में 'उपदेश'।
अब बाढ़ के प्रकोप में डूबा रास्ता उसका।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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