आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

महसूस होने लगी एक सन्तान की जरूरत।।

                
                                                         
                            नौकरी जरूरत या धंधा-पानी जरूरत।
                                                                 
                            
जिम्मेदारियां आते ही माया की जरूरत।।

दोस्ती अपनी जगह रिश्ते अपनी जगह।
अनजान शहर में रही कमरे की जरूरत।।

गुजारा करते सोचा नही सुख चैन खोकर।
यादों में हिस्सा माँगते पेरेंट्स की जरूरत।।

हर एक युवा इस दौर से गुजरता 'उपदेश'।
गुज़र बसर के साथ मोहब्बत की जरूरत।।

चाहते बढ़ती ही जाती अपने छूटने लगते।
महसूस होने लगी एक सन्तान की जरूरत।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
50 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर