नफरती दौर में अच्छा तन्हा रहना जरूरी।
मुंह खोलने से पहले सोचना समझना जरूरी।।
हर कोई पसंद करे तो पहचान कहाँ रहती।
रिश्तों की मंडी में आँखों में खटकना जरूरी।।
फ़ूलों से दोस्ती निभाना है कांटो से डर कैसा।
खुशबू पाने के लिए थोड़ा सा भटकना जरूरी।।
जो खामोशी से जल रहे उन्हें जलते रहने दो।
खुद के हौसलों पर थोड़ा सा थिरकना जरूरी।।
जब कभी रात हो और चाँदनी का साथ फिर।
ख्वाबों में 'उपदेश' संग मदहोश होना जरूरी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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