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सफलता बढ़ती देखकर किस्मत बदलने लगी।

                
                                                         
                            मेहनत में दर्द कितना, किसी ने जाना कभी।
                                                                 
                            
कीमत पूरी मिली नही बिगड़ा पैमाना कभी।।

लचीले पेड़ की तरह झेली है ग़मों की आँधी।
मगरूर पेड़ों का बेहाल देखा अफ़साना कभी।।

छोटे से बड़ा बनना बेशक आसान नही होता।
नौकरी के खातिर मैंने बदला ठिकाना कभी।।

सफलता बढ़ती देखकर किस्मत बदलने लगी।
छालों में अमीरी 'उपदेश' रोया दीवाना कभी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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46 मिनट पहले

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