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खुद में झाँके कौन

                
                                                         
                            अच्छे लोगों की बेपरवाही यहाँ सुधारे कौन।
                                                                 
                            
झांकते रहते इधर-उधर खुद में झाँके कौन।।

ढूँढ़ते रहते कमियां दुनिया में घर-घर मौजूद।
हर किसी को चुप कराते खुद में झाँके कौन।।

जैसे हो वैसे ही रहकर करो प्यार प्रकृति से।
सीधी बातों के आशय पर खुद में झाँके कौन।।

पर 'उपदेश' कुशल बहुतेरे चरितार्थता करते।
समझ न पायेंगे वो लोग खुद में झाँके कौन।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

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