वक्त गुजर गया यादें छोड़ गया।
ध्यान ऑनलाइन से जोड़ गया।।
कहना कुछ चाहा पर क्या कहें।
ऐसे ही लिखती रहना मोड़ गया।।
मेरा क्या इंतजार करना लाजिम।
बदल मत जाना तेरा तोड़ गया।।
आजकल दिन के बाद सीधी रात।
सपने जैसी शाम का तोड़ गया।।
काश तुम भी 'उपदेश' मुझे ढूंढो।
अँधेरा डराए उजाला छोड़ गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X