हर खुशी में छुपी जैसे उसकी बेईमानी।
यही है आज मेरे पास उसकी निशानी।।
वो दिल में है और पास में भी लगता है।
उसी के साथ पूरी होगी अधूरी कहानी।।
दिल को समझाना अब आसान नही है।
इश्क नादां निकला कहने को मेहरबानी।।
मुस्कान के पीछे छुपा लिया है खुद को।
होगा कोई कर्ज उसे अदा करने की ठानी।।
पलकों पर सपनों का बोझ सँभाले हुए।
खामोश से दर्द में 'उपदेश' मेरी जवानी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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