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इंतजार का दौर

                
                                                         
                            बहना अगर मंजूर नही तो हरगिज पाँव ना धरना।
                                                                 
                            
दरिया रूपी रही मोहब्बत इसमें पड़कर होगा बहना।।

सूरज के उगने से चढ़ने तक इंतजार का दौर चला।
जैसे रुख शाम का आया हर ओर अँधेरा से बचना।।

लफ्जों को जिंदा कर देती भोली सूरत वाली अबला।
इश्क मोहब्बत वाली नदियों की तेज धार से बचना।।

वैसे तो धरती की मोटी सतह ठण्डी रहती 'उपदेश'।
ज्वालामुखी अगर फूटा तो बहते लावा से बचना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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47 मिनट पहले

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