लड़कपन से जवानी तक कुछ एक हादसे होते।
कुछ एक याद होते कुछ भुलाने के वास्ते होते।।
हर एक रिश्ते को नाम देना सम्भव नही होता।
बेनाम रिश्ते भी कभी कभी बड़े काम के होते।।
कोई कोई चल देता 'उपदेश' साथ निभाने को।
मयखाने में हर हाथ एक जैसे जाम नही होते।।
कुछ बेशकीमती इंसान भी हैं मतलबी दौर में।
ज़रूरत पड़ने पर उनसे कोई काम नही होते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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