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फूल जैसी शख्सियत

                
                                                         
                            फूल जैसी शख्सियत भी मगन रहती
                                                                 
                            
पतझड़ के मौसम से वो बेखबर रहती
इसी का नाम है खुशमिज़ाज जिन्दगी
बरक्कत के दिनों में मौज अक्सर रहती
जख्म का वक्त पर इलाज मिल जाये
मोहब्बत भी 'उपदेश' बेहद बेफिक्र रहती
-उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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3 वर्ष पहले

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