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दर्द सहना स्त्री जाति का धर्म

                
                                                         
                            कोई पूछता नही उनकी उदासियों का मर्म।
                                                                 
                            
स्त्रियों को खास रिश्ता बताने में आती शर्म।।

आँसू बहा लेती मगर वह जाहिर नही करती।
परिस्थिति बस दर्द सहना स्त्री जाति का धर्म।।

रिश्ता बनाकर छोड़ देना हकीकत में आता।
बात घुमाते वक्त घर में लहजा रखती नर्म।।

दिल का हाल केवल अजीज को ही सुनाती।
असल जिन्दगी में 'उपदेश' गुनगुनाती नज्म।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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42 मिनट पहले

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