चेस का खेल बनाने वाले भी खूब रहे।
पैदल गरीब उनके जानवर अजीब रहे।।
हाथी घोड़ा ऊँट चलाने वाले खिलाड़ी।
बादशाह की रक्षा में वजीर निर्जीव रहे।।
जुबाँ खोलने की इजाजत हरगिज नही।
सभी बेज़ुबान प्यादे सरहद की नीव रहे।।
आदि से आज गरीब सीढ़ी अमीरों की।
पायदान उनके कंधे 'उपदेश' सजीव रहे।।
जीत का श्रेय उसी को मिलता खेल में।
बादशाह को मात देने वाले चिरंजीव रहे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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