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एक पत्नी के आने पर, यूँ अपनी माँ को

                
                                                         
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माँ की ममता
पुष्पेन्द्र कुमार राजेहुरी
ग्राम: बदनपुर, जिला: हमीरपुर
कक्षा: 11वीं

माँ की ममता से यूँ मैं आँचल
ढका करता था।
वो अपना निवाला ना खाकर,
मुझे खिलाया करती थी,
वो माँ क्या माँ है !
अपनी जान की बाजी लगाकर,
मुझे बचाया करती थी।
खान-पान का हो या अन्न का दान,
वह अपना ना खाकर, मुझे
खिलाया करती थी,
वो माँ क्या माँ है !
जब मुझे नींद ना आया
करती थी, यूँ लोरी सुनाया करती थी।
ये जिस माँ ने मुझे पाला-पोसा,
यूँ थोड़ी से स्वार्थ में, माँ को यूँ भूल गया!
एक पत्नी के आने पर, यूँ अपनी माँ को
यूँ भूल गया!
माँ की ममता से यूँ मैं आँचल
ढका करता हूँ।
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