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भाई-भाई लड़ेंगे, भूलेंगे धर्म-संस्कार।

                
                                                         
                            कलयुग का विनाश रूपी छाया से मंडरा रहा है अंधियारा,
                                                                 
                            
दोस्ती-भाई-रिश्तेदार कोई न होगा कलयुग में सहारा।

ये दुनिया मतलब की, मतलब का है संसार,
अब अंधियारे में यूं सबको समा जाना,
न होगा उजियारा न होगा सहारा।

लोभ-मोह में फंसा है मानव सारा,
सत्य की राह से भटक रहा है किनारा।

अंत में न प्रेम रहेगा न प्यार,
भाई-भाई लड़ेंगे, भूलेंगे धर्म-संस्कार।
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2 घंटे पहले

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