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घनानंद

                
                                                         
                            अखंड भारत के करता हैं हम,
                                                                 
                            
क्षत्रप मेरी पहचान है।
हम नन्द वंश के नाई है,
हम घनानंद के शान हैं।

जिसने कर दी एक मिलाप,
बांग्लादेश से अफगानिस्तान को।
प्रथम सम्राट कोई और नहीं था,
घनानंद थे, पढ़ लो तुम इतिहास को।

रघुवंशी, यदुवंशी सुना था,
सुना था सूर्यवंशी इस समाज में,
सबको जान हैरानी होगी,
नंदवंशी का डंका था हर राज में।

यूं ही नहीं सिकंदर हारा था,
जिसका विश्वविजेता नारा था,
मगध राज्य पर उठाई जिसने भी,
काल ग्रास में वह बिचारा था।

इतिहास हमारी पृष्ठभूमि को,
बहुत भुलाए बहुत नकारे।
मान सम्मान की बलि दिला दी,
इतिहासकार हमारे है हत्यारे।

धन्य विदेशी आगंतुकों का,
जिन्होंने ने हमारा इतिहास बचाया,
पाखंडी व्याभिचारी जन तो,
हमको थे गौरव से मिटाया ।
-यूकेश बिजपुरी
 
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3 महीने पहले

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