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मंदिर ममता की

                
                                                         
                            जिगर का टुकड़ा हूं,
                                                                 
                            
उसके आंखों का तारा।
बिन उसके हु मैं,
किस्मत का मारा।
परिभाषा प्यार की,
दया और दुलार की।
कैसे व्याख्या करू,
फूलों के बहार की?

उसका हसीन हसमुख चेहरा।
कोसों दूर बस्ता है।
क्यो उलझ जाता ये सीधा रस्ता है?

बयां करती उसकी आंखे,
सर्द से गर्म,
मेरा ही रस्ता ताके।

जिसे खोने के डर से.
वक्त हर पल सताता है।
मुझे खून के आसुओं से रुलाता है।
- उज्जवल शाह
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2 वर्ष पहले

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