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मां की ममता

                
                                                         
                            मां के ममता को आज तक कौन तौल पाया!
                                                                 
                            
जिसने मां को रुलाया है कहां सुख भोग पाया है

मां शीतलता है मां ही सुखों का अनंत छांव है।
जिसने मां को गाली दी है वक्त ने वही दोहराया है।।

जीवन उसी की देन हैं जिसे मां ने हमे उतारा है।
गहरा घाव सहा है उसने भी जिसने हमे अपनाया है।।

मां कौशल्या है, मां कैकई है और मां यशोदा है।
प्रेम का भाव हर रूप में रखा है और उसने दोहराया है।।

जन्मों जन्मों की का नाता मां से ही जुड़ता है हमारा।
मां की महिमा ईश्वर भी ना जाने जिसने उसे बनाया है।।
-उज्ज्वल कुमार
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2 वर्ष पहले

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