श्री राम की है ये विरासत,सीखो उनके आदर्शों से।
शौर्य सुगंधित यह मिट्टी है, वीरों के बलिदानों से।
जिस मिट्टी की ख़ातिर राणा जंगल जंगल घूम गए।
और स्वाभिमान के लिए यहां पर,घास की रोटियां चूम गए।
वतन की खातिर खुदीराम भी,अपना बचपन भूल गए।
खेल खिलौने त्याग सभी, फांसी का फंदा चूम गए।
इस पावन रज की ख़ातिर,भगत भी फंदा चूम गए।
इंकलाब के नारे पर,अशफाक रस्सी पर झूल गए।
निज पिस्तौल गोली को आजाद ख़ुशी से चूम गए।
हम रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान,व्यर्थ न होने देंगे।
रणबांकुर युवा भारत का,अब शीश नहीं झुकने देंगे
आँच अखंडित भारत पर, वे कदापि नहीं आने देंगे
रहे झूमता सदा तिरंगा, वीरों के बलिदानों से।
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