आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सुख सौभाग्य का पर्व

                
                                                         
                            श्री करवाचौथ कार्तिक मास का पर्व
                                                                 
                            
कृष्ण पक्ष चतुर्थी को आता,
मुख्य कथा वीरावती सात भाईयों की
अतिस्नेह से कब हानि समझाता।
यह पूर्ण दिवस का निर्जला उपवास
कहीं सास की सरगी से नाता,
आज बाजारवाद में छाया है पर्व
समय परिवेश का प्रभाव जताता।
चन्द्रदर्शन से जुड़ा पावन त्यौहार
उसको अर्घ्य से पूरित हो पाता,
विधि विधान श्रद्धा से परिपूरित
कृपा मां पार्वती शिव की दिलाता।
पति दीर्घायु सुखी वैवाहिक जीवन
श्री करवा पर्व से बड़ा है नाता,
करवा सींक सभी श्रंगार सामग्री
चौथ माता मन्दिर बरवाड़ा पाता।
उत्तरी राज्यों का प्रमुख पर्व यह
अरावली लक्खी मेला सजाता,
पौराणिकता से प्रथमव्रती पार्वती
द्रोपदी रानी वीरमती होकर आता।
कभी युद्ध सैनिकों की वापसी से
फसल चक्र से जुड़ जाती गाथा,
नारद पुराण कहे करक चतुर्थी
सुख सौभाग्य से सदा मिलाता।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
18 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर