ज़िंदगी एक डोर है थामें उड़ती पतंग को,
टूट छुट जाती है कभी तो पतंग वो !
दीपा✍️
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X