तुम कहते थे कि, कुछ करो, कुछ नहीं मिला तोह शून्य सही, क्योंकि करने से शुरुवात ही सही।
तुम कहते थे कि, कुछ करो, कुछ नहीं मिला तोह शून्य सही, क्योंकि करने से शुरुवात ही सही,
अब तुम्हारे बिना, राह क्या देखे, क्या करे शुरुवात, क्या करे न कही, अब जब देख के पता लगे,
मेरे लिए तुम्हारा प्यार, शून्य ही सही।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X