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हाँ में बदल ने लगी हूँ

                
                                                         
                            रंजो गम के सिवा दुनिया में रखा क्या हे?
                                                                 
                            
मेरी हर खुशी को दीमक ने खा रखा हे |
ज़िम्मेदारियों ने वक्त से पहले समझदार बना दिया,
नहीं तो दिल में बचपना आज भी ज़िंदा रखा हे |
अब तितली नहीं मधुमक्षी सा स्वभाव रखती हूँ,
में भी अपने चेहरे पर अब नक़ाब रखती हूँ |
दुनियादारी की जब से समझ रखने लगी हूँ
आत्म संघर्ष के बाद प्राप्त आत्मबोध का दीपक
और तेज़ जला रखी हूँ |
जैसे को तैसे का चलन चला रखी हूँ |
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3 घंटे पहले

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