ये जीवन है,,,
जीवन एक मंज़र है
कभी तन से सुंदर
तो कभी मन से
मंदर।
कर्मों की बहती
बयार,
बतलाती जतलाती
कभी तन का
प्यार,
तो कभी मन का व्यवहार।
जीवन के सोपानों में
मनमीत मिले
कभी स्वप्न में
तो कभी जतन में।
कभी तरुणाई
कभी अरुणाई
आती जाती
ज्यों चेहरे और मन
की लुनाई।
धूप छांव का खेल
है जीवन,
कभी लगे उपवन
तो कभी लगे तपोवन ।
जीवन है तो
मनभावन का सावन है
नहीं तो बस मिट्टी को संजोने
ओ सहेजने का बहाना है ।-सूर्यकांत शर्मा
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