मैं ख़ुश हूँ कि
आज़ाद हूँ,,
मैं खुश हूँ कि आज़ाद हूँ,
मैं सुर्खरू हूँ कि आज़ाद हूं।
खुद मुख़्तार हूँ!
पर अपने मुल्क का
ख़िदमतगार हूँ।
मैं खुश हूँ
कि मैं लोकतंत्र हूँ।
मेरे वोट से बदलते हैं,
सिंहासन के सिपहसालार!!!
मैं कहीं भी,
कभी भी,
कैसे भी,
आ-जा सकता हूँ।
जब जी चाहे,
वो बोल सकता हूँ।
परिंदों की मानिंद
चहक - लहक कर
बहक कर महक कर
अमन ओ चैन से सराबोर,
मैं बुद्ध हूँ,
गौतम हूँ,
महावीर हूँ,
सिद्धार्थ हूँ।
मैं ख़ुश हूँ कि
मै शाद हूँ आबाद हूँ।
आँखों में ख़्वाब हैं,
दिल में गुलाब है,
हाथ में शमशीर लिए,
मैं अपने मुल्क का
निगेबान हूँ।
मेरी माटी में सोना है,
खुशहाल मेरे देश का
कोना कोना है।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
अनेकता में एकता का रंग है !
राग है,!रास है!
ना कोई धारा 370 है
ना कोई धारा 35ए है।
मैं बाज़ हूँ
औ बादलों के पार हूँ।
कभी अंतरिक्ष में चंद्रयान हूँ!
तो कभी विश्व मानचित्र के
ऊंचे से ऊंचे पायदान
पर विद्यमान हूँ।
मैं ख़ुश हूँ कि आज़ाद हूँ।
मेरे यहां इंसा भी भगवान हैं,
मेरे यहाँ शैतां भी मेहमान है।
मेरे हिस्से कई हुए,
मेरे किस्से कई हुए।
फिर भी मैं आज़ाद हूँ
बुलबुलों का बुलसितां हूँ,
गुलों का गुलिस्तां हूँ।
मेरे मुल्क का अनोखा सा
निज़ाम है,
हर आपदा में अवसर है।
हर महामारी में
गणतंत्र का साथ है
मेरे देश में,
आज साइंस औ तकनीक
का राज है।
जो खोलता हर राज़ है।
हर आपदा में
वसुधैव कुटुंबकम् का
विश्वास है,
इसीलिए विकास भी
हमारा ख़ास है।
क्योंकि चूँकि! किंतू !
परंतु से!!!!
मैं आज़ाद हूँ
मैं जी, हां मैं,
बस और बस,
मैं आपका औ हमारा
हिन्दोस्ताँ हूँ।
आज़ाद हूँ आज़ाद हूँ।
आपका मित्र
-सूर्य कांत शर्मा
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