एक सितारा डूब गया,,,,
दुनिया के संगदिल
रस्मों रिवाज़ के
समंदर में डूब गया
अदा ओ अदब का
एक सितारा ।
एक मुकम्मल
शायरा
छोड़ गई तंगदिल
दुनिया का दायरा।
कितना मासूम
एक सितारा!
ज़िंदगी की चाह में
मुहब्बत की राह में
वो कमसिन,
कम नसीब,
ढूंढता रहा
बस एक अदद
सहारा।
बेमिसाल खूबसूरती
का सरमाया था
वो बेनज़ीर सितारा।
वफ़ा - ए रूह,
पर बरसी ताउम्र
ज़ुल्म ओ सितम
की चिंगारियां
तिस पर भी
वो नर्गिसी फूल
सो गया कब्र में
छोड़ ज़िंदगी की
दुश्वारियां।
एक सितारा डूब गया
छोड़ता साहिर के
सुलगाते सवालों का
धुआँ ! धुआँ !धुआँ?
आधी आबादी की
सिसकियां! सिसकियां!?!
-सूर्यकांत शर्मा
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