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अपनी जड़ों से जुड़ाव

                
                                                         
                            अपनी जड़ों से जुड़ाव,,,
                                                                 
                            

संस्कृति हो या प्रकृति
दोनों ही चाहें जुड़ाव।
पेड़ पौधों से लेकर
मानव जीवन तक,
वही जीता रहा
इस जग में,
जिसे रहा अपनी जड़ों से जुड़ाव।
दुनिया के किसी
कोने में हो,
पर आधार है
माँ - माटी - मानुष
का जुड़ाव।
जड़ों से जुड़ाव
देता जीवन को
दोहराव,
बढ़ता जिस से
जीवन का चाव।

सत् चित्त आनंद
से सात्विक
गर मिलें भाव
तो स्वतः ही हो
जायेगा,
जड़ों से जुड़ाव।

वेद पुराण उपनिषद
कहते आए,
गर चाहिए जीवन
में हास्य ऑ लास्य
तो समझो,
जड़ों से जुड़ाव का
भाव।

यह भी तो है,
सत्य एक निर्विवाद
जीता वही इस दुनिया में,
जिसने जीवन के
हर पड़ाव पर
रखा अपनी जड़ों
से जुड़ाव।

और तो और
गर चाहिए,
जीवन की लंबी
और बरगद सी
प्रत्याशा,
तो जड़ों के जुड़ाव
में निहित है वही आशा।
प्रकृति ने उकेरी
है ,
जड़ों से जुड़ाव की
कितनी सुंदर जिजीविषा।
यूं भी जीव जब तक
जुड़ा है परमात्मा से
तभी तक निहित है
जीवन की परिभाषा।
-सूर्यकांत शर्मा
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15 घंटे पहले

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