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अनुभव की गठरी

                
                                                         
                            अनुभव की गठरी
                                                                 
                            

जीवन के हर सोपान
पर समृद्ध होती,
अनुभव की गठरी।

कुछ खट्टे कुछ मीठे
और कुछ अनुपम
अद्वितीय अनुभव
भरते अनुभव की
गठरी।
जीवन ज्यों ज्यों
बूढ़ा होता
सत्य से दोचार
होता
तब भी सद्य रहती
अनुभव की गठरी।

हर मानव की थाती
होती,
भूत वर्तमान को
समेटे साथ रहती
यही अनुभव की
गठरी।

बस ध्यान रहे
कि अनमोल है
बेमिसाल है
जीवन का आधार है
यही अनुभव की
गठरी।

हर जीवन का
अंतिम प्रसाद है
अनुभव की गठरी।

जीवन की अंधी
भाग -दौड़ में,
ध्यान रखना
के बन न जाए
कहीं ये ठठरी।

संस्कार औ संस्कृति
की सहोदरा है,
जीवन की धारा है
यही तुम्हारी अनुभव
की गठरी।

ज्ञान भक्ति अध्यात्म
से हर पूरीत हो
गर अनुभव की
गठरी।

सत् चित्त आनंद के
इंद्रधनुषी रूप का
संधान है
अनुभव की गठरी।
आपका मित्र
- सूर्यकांत शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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