आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बुराई पर अच्छाई की जीत

                
                                                         
                            एक था ,
                                                                 
                            
लंका का राजा।
कभी ना जिसने ,
कहा किसी का माना।
रावण था उसका नाम,
खुद पर था उसको अभिमान।
एक बार,
माता सीता को हर लाया।
देखो कैसा,
बुरा काम वो कर आया।
लक्ष्मण संग राम जी,
जब कुटिया में आए ।
सीता जी को ना पाके वो घबराए ।
रावण संग राम जी ,
की हुई लड़ाई।
रावण को हराया ,
उन्होंने माता सीता वापस पाई ।
दस सर वाले ,
रावण की हुई हार ।
अच्छाई पर,
बुराई की हुई मात।
दशहरे का पर्व,
तब से मनाया जाता।
बुराई पर अच्छाई की जीत,
का यह संदेश लाता।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर