मनमोहिनी जिनकी सूरत,
मंत्रमुग्ध जिनकी मुस्कान।
कहलाते देवकी नंदन,
हैं यशोदा के लाल।
बांसुरी की धुन पर जिनकी,
सारी गोपियां हुईं निहाल,
ऐसे नंद किशोर का है,
पावन जन्मदिन आज।
मंदिर सजे चारों ओर,
हो रहे मंगल गान।
लड्डू गोपाल की एक झलक को,
उमड़े सारा संसार।
सुंदर वस्त्र धारे,
पहने मोर पंख का ताज,
प्यारी सी इस छवि ने उनकी,
मोह लिया सबका मन आज।
माखन-मिश्री का सब भोग लगाते,
सांवरे पर सब अपना प्यार बरसाते।
ऐसी मोहक छवि पर बलिहारी सारा संसार,
आज आई है हर द्वार पर खुशियों की बहार!
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