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शहर जाना जरूरी है

                
                                                         
                            शहर जाना जरूरी है।
                                                                 
                            
गरीबी का बना मंजर,
हटाना भी जरूरी है,
शहर जाना जरूरी है।
फटी साड़ी वो अम्मा की,
टपकती बूंद छप्पर की ।
घटा काली वो सावन की,
हटाना भी जरूरी है,
शहर जाना जरूरी है।
सूखी रोटी गरीबी में ,
फटे कपड़े न चप्पल थे।
वह छोटी चूस की गोली,
को घर लाना जरूरी है।
शहर जाना जरूरी है।
गरीबी में पड़े ताने,
कभी बिस्किट कभी दाने।
वह लाचारी के दिन अपने,
हटाना भी जरूरी है ।
शहर जाना जरूरी है।
तड़पती दर्द से अम्मा।
बिलखती थी वो जब अम्मा,
कसक बस एक है अपनी,
दवा लाना जरूरी है ।
शहर जाना जरूरी है।
वह बच्चे भूख से तड़पे,
ना छाती से ही कुछ निकले।
ना घर, दाना था, न था पानी,
उसे लाना जरूरी है ।
शहर जाना जरूरी है।
कई अरमान है अपने
हो शिक्षा स्वास्थ्य घर अपने,
खुशी हो घर में भी अपने,
यही लाना जरूरी है।
शहर जाना जरूरी है।
-सुरेश कुमार तिवारी
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एक वर्ष पहले

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