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मां का दर्द

                
                                                         
                            वो तो राहे तकती होगी,
                                                                 
                            
मेरी मां जिधर भी होगी।
एक टक सूरज को देखें,
फिर वो राहे तकती होगी।
मेरी मां जिधर...........
दर्द सदा ही छुपाती है वो,
कष्ट को दूर भगाती है वो।
लोरी सदा सुनाती है वो ,
खाती नहीं खिलाती है वो।
दिवाली होली जब होगी ।
तब तो राहे तकती होगी।
मेरी मां जिधर भी होगी।
आंख से नीर छुपाती होगी।
चूल्हा आग जलाती होगी।
रोटी चाय बनाती होगी ।
इंतजार खुब करती होगी।
सूख गई मां हमें बनाकर ।
रातो दिन वो जाग जाग कर।
भूल गए हम पैसा पाकर।
बीवी बच्चे संग ले जाकर ।
भूल गए ऐसी कुछ होगी ।
एक दिन हालत ऐसी होगी।
जैसी हालत मां की होगी।
वह तो राहे तकती होगी ।
मेरी मां जिधर भी होगी।
-सुरेश कुमार तिवारी
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10 महीने पहले

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