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सिकंदर या बदनसीब

                
                                                         
                            इस दुनियाँ में ,
                                                                 
                            
अजब ही - -
मंजर है ,
कहीं पर - -
अपनापन दिखता है - -
तो कहीं ,
पीठ पीछे - -
खंजर ,
क्यों हैं ?

यह भी मालुम है ,
दुनियाँ को - -
कन - कन में ,
भगवान बसते हैं - -
तो इस धरती पर,
कहीं मस्जिद - -
तो कहीं ,
मंदिर - -
क्यों है ?

इसी क्रम में ,
जब सारे जहाँ के - -
बंदे आपके है ,
तो फिर कोई - -
दोस्त या ,
या कोई - -
दुश्मन ,
क्यों है ?

और अंत में,
तू लिखता है - -
हर किसी का,
मुकद्दर - -
तो कोई ,
बदनसीब - -
और कोई ,
मुकद्दर का - -
सिकंदर ,
क्यों है?
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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एक घंटा पहले

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