आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सच से दुरी

                
                                                         
                            सच में ,
                                                                 
                            
जो झूठ का - -
सहारा लेता है,
या यों कहे तो - -
जो झूठ ,
बोलने के - -
आदी हो जातें हैं ,
उन्हें सच बोलने में - -
कठिनाइयाँ होने,
लगता है - -
और धीरे - धीरे,
उसे सच से - -
या बोलने से वास्ता,
खत्म होने - -
लगता है l

दूसरे शब्दों में ,
जब आप - -
झूठ का सहारा लेकर ,
किसी गलती को -
छुपाने का - -
प्रयास करते हैं ,
तो समझ जाइये - -
आप सुधार की ,
संभावनाओं को - -
कम कर रहे हैं l

इसी क्रम में

यदि झूढ बोलने की ,
आदत हो जाती है - -
या पड़ जाती है तो ,
आपके लिए - -
सच बोलना ,
बहुत ही - -
कठिम हो जाता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर