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दामन भी नीयत पाक साफ

                
                                                         
                            आओ, मिल बैठ कर बात करें।
                                                                 
                            
ज़रूरत हो तो दो-दो हाथ करें।
क्यों जाएँ औरों की चौखट पर।
आपस में सुलह की बात करे।

कभी थे शिकवे शिकायते हुई।
कभी बात बात में तकरार हुई।
टकराव की वजह आम ही थी।
कदम ओर अब आगे न बढाए।

पल पल का ये रूठना मनाना।
कभी लड़ना और मुंह फुलाना।
बार बार गड़े मुर्दे उखाड़ लाना।
चलो कोई नई वजह ढूंढ लाए।

बात करने का माहौल बनाए।
जंग का सीजफायर हो जाए।
तुम छेड़ो कोई तराना सुहाना।
साथ मिल बैठ हम गुनगुनाए।

बात नही रही अब सुलह की।
छोड़ो बहाने हकीकत में आए।
क्यों बंद कमरे में करे गुफ़्तगू।
दामन पाक है मांग पे बात करे।

जब बात हो तो ज़ुबां साफ़ हो।
दामन भी नीयत पाक साफ हो।
देखना कोई दूरी की बात न हो।
दिल में इश्क़ की जोत जलाए।
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एक वर्ष पहले

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