हमारी रोक-टोक ने
तेरे पैरों को ज़मीन पर टिका दिया
थमती हुई तेरी साँसों को
जीना सिखा दिया
तेरे हाथों में कलम दिया
तुझे लिखना सिखा दिया
हमने हर आँधी-बारिश से
तुझसे लड़ना सिखा दिया
तूने हमारे प्यार को
पाबंदियों का नाम दिया
हमारे लालन-पालन को
बदनाम किया
अब तू हमारे घोंसले की
चिड़िया नहीं रही
हमारी रोक-टोक
अब तेरे लिए नहीं है सही।
-- सुरेन्द्र पाण्डेय
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X