आया नवंबर
नर्म सी मुलायम धूप लेकर —
जैसे प्रकृति ने थकान के बाद विश्रांति का
आभास दिया हो।
यह महीना बड़प्पन सिखाता है —
पत्तों के झरने में भी नई हरियाली की प्रस्तावना छिपी है।
धीरे-धीरे दिसंबर आएगा —
शांत, धुंध से लिपटा, आत्ममंथन का समय लिए।
और जनवरी —
नए वर्ष की पहली सांस बनकर, नवप्रेरणा का दीप जलाएगा।
पर नवंबर कह जाएगा —
“नववर्ष का दीप जलाए रखना,
मैं फिर आऊँगा।”
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