उलझने मेरी और न बढाओ
कुछ है जो मेरा उसे मेरे हवाले करदो
यूँ ही खामखां जवानी बीत रही है
खुदा, कुछ असर हमारे दिल तक भी करदो
जमीं पर ही गले लगा लूँ
वो चाँद अगर एक दफा इधर दो
नजरे मेरी आसमाँ छू जाती है
मैं देखूं भी न उस और ये सरोकार कर दो
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