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अजनबियों के शहर आकर

                
                                                         
                            खो गया हूँ मैं अजनबियों के शहर आकर
                                                                 
                            
एक तस्वीर ने बताया की मैं कैसा था

उसकी तो खुदा कसम नजरे भी जहरीली थी
वो बचपन का साथी बेशक मरहम के जैसा था

फिर वही आशिकी और वही मुलाक़ाते
वो पल भी कैरव के पत्तों के जैसा था

मेरी नादानियां भी मेरे गाँव तक साथ थी
वो रूठना भी क्या कमाल के जैसा था

 
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एक घंटा पहले

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