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देश हमारा हिन्दुस्तान

                
                                                         
                            कहीं होते भजन प्रभु के कहीं होती मस्जिद में अजान,
                                                                 
                            
बुलंद नारे वीर छत्रपति के साथ सम्राट अकबर भी महान;
शौर्य बुंदेलों का जिनमें जहां क्षत्रिय वंशज हैं श्री राम के,
गरज से जिनके दुश्मन भागे वही देते स्वयं प्राण बलिदान।
'यही बंदगी' यही है उल्फत' यही बस अपनी पहचान;
पर्युषित हम जिस धरा के देश हमारा हिन्दुस्तान।

रक्तधारा से होली खेले आजादी के मतवाले,
जाति धरम ना कोई उनका मातृभूमि के रखवाले;
वीरांगना वो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई था जिनका नाम,
लखनऊ की जिसने रखी शान थी वो जीनत महान;
हुंकार से जिसके थर्राता वैरी,
रक्त से वसुधा सींच गया जो था वो हजरत टीपू सुल्तान।
'यही बंदगी' यही है उल्फत' यही बस अपनी पहचान;
पर्युषित हम जिस धरा के देश हमारा हिन्दुस्तान।

भगत,राजगुरु,बलिदानी बिस्मिल इक थाली में ही खाते,
बांध कफन अपने माथे वो मिल 'हिंद-तराना' लय में गाते;
सिंधी-हिन्दी,उड़िया-उर्दू, रंगीं बोली है अपने भारत की शान,
चर्च-मंदिर,मस्जिद-गुरुद्वारा तहजीब ये गंगा-जमुनी की पहचान।
'यही बंदगी' यही है उल्फत' यही बस अपनी पहचान;
पर्युषित हम जिस धरा के देश हमारा हिन्दुस्तान।

©️सुहानी राय
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

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