भक्ति से खाली
पर मंदिर मध्य
भीड़ निराली।
मधुर तान
अंतर्मन वंशी का
क्यों है वीरान?
नहीं सहन
शांति, उन्हें चाहिए
युद्ध गहन।
युद्ध मवाली
शांति का ढोल पीट
गाता कव्वाली।
लगा मुखौटे
बांटें झूठी खुशियां
मन के खोटे।
शीतल हवा
बहो, धरा है बनी
गरम तवा।
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