ऐसा नहीं कि नौकरी आखिरी चुनाव बाकी है
ऐ जिंदगी अभी भी मेरा आखिरी दांव बाकी है
इस शहर ने भले ही लूट लिया हो मेरा सब कुछ
पर लौटने को घर पर मेरा अभी गांव बाकी है
-सुखप्रीत सिंह "सुखी"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X