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मेरे सामने एक रिश्ता

                
                                                         
                            आज अस्पताल में मैंने,
                                                                 
                            
एक भाई-बहन को लड़ते हुए देखा,
छोटी-सी बात पर दोनों को,
एक-दूजे से रूठते हुए देखा।

भाई की नादानी देखी,
बहन की समझदारी देखी,
उसकी डाँट के पीछे छिपी,
ममता की जिम्मेदारी देखी।

उनकी छोटी-सी नोक-झोंक में,
एक अलग ही प्यार देखा,
बिना कहे ही दोनों ने,
एक-दूजे का संसार देखा।

मैं अपने अस्पताल के बिस्तर पर,
चुपचाप उन्हें देखता रहा,
उनके उस प्यारे से रिश्ते में,
कुछ अपना-सा खोजता रहा।

भाई था छोटा और बहन थी बरी,
जिस तरह चाहिए था मुझे ।
मेरी जिंदगी।

उस दिन अस्पताल के कमरे में,
मैंने एक खूबसूरत रिश्ता देखा,
दो लोगों की नोक-झोंक में,
मैंने अपना एक सपना देखा।
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37 मिनट पहले

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