नमन उस चरण को करोड़ों है मेरा,
किया जिसने जीवन में सबका सवेरा।
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा,
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा।
अनगिनत लोग आए और गए इस जहाँ में,
मगर दर्द किसका दिखा इस जहाँ में।
बद से बदतर रहा जीवन हमारा,
तभी इस धरा पर जन्मा मसीहा हमारा।
बन मसीहा जिसने जीवन सँवारा,
वो कोई नहीं—भीम साहब हमारा।
गरीबों के जीवन का चमका सितारा,
वो मेरा नहीं है—वो भारत का प्यारा।
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा,
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा।
इतिहास है इन सबका साक्षी पुराना,
न थी हाथ में कलम, न शिक्षा का ठिकाना।
अधिकार जीने का जिसने दिलाया,
दबे-कुचलों को जिसने इंसान बनाया।
कमर में बेल्ट और गर्दन में टाई,
पढ़ने-लिखने की जिसने लौ है जलाई।
खाने, जीने और पढ़ाई का सहारा,
दबे-कुचलों को दिखाया किनारा।
अँधेरों में जिसने उजाला उतारा,
और कोई नहीं—भीम मसीहा हमारा।
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा,
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा।
शिक्षा का दीपक जलाकर दिया,
सम्मान से जीने का अधिकार दिया।
संविधान की शक्ति से सबको सँवारा,
न्याय और समता का पथ दिखाया प्यारा।
जिससे मिला हमें अपना सहारा,
जिससे मिला हक और सम्मान हमारा।
जिसने बदला सदियों का अँधियारा,
वो कोई नहीं—भीम साहब हमारा।
गाड़ी, बंगला और इज्जत मिली सारी,
पर सबसे बड़ी है चेतना हमारी।
ये दौलत नहीं, उनका उपकार है,
हर शोषित के जीवन में उनका विचार है।
जब तक रहेगा ये भारत हमारा,
तब तक रहेगा नाम भीम का प्यारा।
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा,
सिर्फ मेरा नहीं, वो तो सबका हमारा।
— सूबा लाल "अंजाना"
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