इस मिट्टी के किस गुण का
विस्तार किया जाए।
इसमें इतने गुण है कि,
कोई पार नहीं पाए।
जीवन दायिनी होकर भी,
उसको फिर वापस लेती है।
दुनिया के रंग ए महफ़िल का
मजा भी यही देती है।
एक सीमा में बांध रखा है,
उससे बढ़ने न देती है।
वह किसान बन कहती है,
यह नित प्रति अपनी खेती है।
-सूबा लाल "अंजाना"
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