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दुख और बाधाएं

                
                                                         
                            दुःख ने डेरा डाल दिया हो, तो मत घबराना,
                                                                 
                            
दुःख ने घर बना लिया हो, तो मत चक्कर खाना।
धैर्य, शांति और साहस रख, तर्क-शक्ति को लाना,
रोकर आँसू मत बहाना, न अपना चैन गँवाना।

आगे बढ़ने, अच्छे फल की सोच सदा मन में लाना,
जीवन के संघर्षों से लड़कर आगे बढ़ते जाना।
अड़चन जब आती है, इंसान बहुत उलझ जाता है,
पर अड़चन और उलझन में, उलझकर मत रह जाना।

कई रास्ते होते हैं, जो सुगम राह दिखलाते हैं,
समय भले ही अधिक लगे, फिर भी मंज़िल तक पहुँचाते हैं।
जल्दी में गलत राह चुनकर, राह कठिन मत कर लेना,
सोच-समझकर कदम बढ़ाना, धैर्य को कभी मत खोना।

जिंदगी बड़ी अड़बंगी है, पर सीधी भी हो जाती है,
मुश्किल राहों पर चलने से, राह नई बन जाती है।
जो हर कठिनाई से लड़ता, वही आगे बढ़ पाता है,
जो डरकर बैठा रहता है, अवसर हाथ से जाता है।

दुःख आए तो धैर्य रखो, सुख आए तो मत इतराना,
समय किसी का एक-सा रहता नहीं, यह सत्य सदा अपनाना।
हिम्मत, मेहनत, विवेक साथ हों, राह स्वयं बन जाएगी,
काली रात के बाद निश्चित, नई सुबह फिर आएगी।

दुःख जीवन की परीक्षा है, इससे कभी न घबराना,
हर मुश्किल को सीख समझकर, अपना मार्ग बनाना।
गिरकर फिर उठते रहना ही, जीवन की सच्ची जीत है,
धैर्य, साहस और कर्म के आगे, हर बाधा छोटी रीत है।
-सूबा लाल "अंजना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
40 मिनट पहले

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